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अफीम नीति 2026-27: 1.33 लाख किसानों को लाइसेंस, 18 हजार नए किसानों को मौका

केंद्र सरकार ने अफीम खेती के लिए नई नीति 2026-27 जारी की है। इसके तहत मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के करीब 1.33 लाख किसानों को खेती के लाइसेंस मिलने की संभावना है। लगभग 18 हजार नए किसानों को भी अवसर मिलेगा। मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों के हजारों किसानों को इस नीति से लाभ मिलने की उम्मीद है।

ई-इंदौर डेस्क 26 Oct 2026 32 बार देखा गया Madhya Pradesh
अफीम नीति 2026-27: 1.33 लाख किसानों को लाइसेंस, 18 हजार नए किसानों को मौका

अफीम नीति 2026-27: 1.33 लाख किसानों को लाइसेंस, 18 हजार नए किसानों को मौका  |  ई-इंदौर फोटो

Opium Farming Policy 2026-27: केंद्र सरकार ने 24 अक्टूबर को नई अफीम नीति 2026-27 की जानकारी जारी की। इसके तहत मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लगभग 1.33 लाख किसानों को खेती का अवसर मिलेगा। पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 18 हजार अतिरिक्त किसान लाभान्वित हो सकते हैं।

मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों के किसानों के लिए यह नीति महत्वपूर्ण है। सरकार ने लाइसेंस, खेती के क्षेत्रफल और उत्पादन के नए मानक निर्धारित किए हैं।

10,500 पुराने किसानों को दोबारा मौका

नई नीति में वर्ष 1998 से 2003 के बीच लाइसेंस गंवाने वाले लगभग 10,500 किसानों को फिर अवसर मिलेगा।

इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के किसान शामिल हैं। पात्रता पूरी करने वाले किसान दोबारा लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे।

इस फैसले से लंबे समय से खेती की अनुमति का इंतजार कर रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

चीरा पद्धति के नियम हुए सख्त

सरकार ने पारंपरिक चीरा पद्धति के लिए न्यूनतम उत्पादन मानक बढ़ाया है।

अब किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 4.4 किलोग्राम मॉर्फिन औसत की शर्त पूरी करनी होगी। पिछले वर्ष यह सीमा 4.2 किलोग्राम थी।

कम उत्पादन वाले पात्र किसानों को CPS पद्धति में स्थानांतरित किया जा सकता है।

कितनी जमीन पर मिलेगी अनुमति?

नई नीति के अनुसार, पारंपरिक चीरा पद्धति में 0.10 हेक्टेयर खेती की अनुमति निर्धारित है।

बिना चीरा पद्धति के लिए 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र तय किया गया है। किसानों को निर्धारित शर्तों के तहत पट्टे की जमीन पर खेती करने की अनुमति भी मिलेगी।

खेती के क्षेत्रफल में पांच प्रतिशत तक अतिरिक्त रकबे की छूट का प्रावधान है।

CPS पद्धति में क्या बदलेगा?

CPS यानी Concentrated Poppy Straw प्रणाली में पारंपरिक चीरा लगाने के बजाय पोस्त के पौधे से संबंधित सामग्री एकत्र की जाती है।

नई नीति में इस पद्धति के लिए न्यूनतम उत्पादन मानक 800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखा गया है।

अगले वर्ष यह सीमा 900 किलोग्राम निर्धारित करने का प्रावधान है।

मध्य प्रदेश के किसानों को कितना लाभ?

नई नीति से मंदसौर, नीमच और रतलाम के लगभग 54 हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

mp farmers के लिए लाइसेंस पात्रता और उत्पादन मानक महत्वपूर्ण रहेंगे।

नीमच में 10 हजार मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाली पोस्त भूसा प्रसंस्करण इकाई भी प्रस्तावित है। इसे आगामी वित्तीय वर्ष में शुरू करने की योजना है।

ऑनलाइन कैसे मिलेगा अफीम लाइसेंस?

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) पात्र किसानों की सूची ऑनलाइन जारी करेगा।

किसान आधिकारिक पोर्टल पर अपना नाम और पात्रता जांच सकेंगे। पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर भी जानकारी मिलेगी।

मौजूदा लाइसेंसधारियों को सामान्यतः पुराने दस्तावेज दोबारा जमा नहीं करने होंगे।

farmer id mp और mp farmer sahayak से संबंधित जानकारी तलाशने वाले किसान ध्यान दें। अफीम खेती का लाइसेंस सामान्य कृषि पंजीकरण से अलग प्रक्रिया है।

अफीम के भाव पर क्या फैसला हुआ?

नई नीति में किसानों की अफीम खरीद कीमत बढ़ाने की मांग पूरी नहीं हुई है।

afeem rate in india से जुड़ी जानकारी के लिए किसानों को सरकारी खरीद दर और अधिकृत निर्देश देखने चाहिए।

लाइसेंस मिलने का अर्थ बाजार में स्वतंत्र बिक्री की अनुमति नहीं है। अफीम की खेती और खरीद सरकारी नियंत्रण में होती है।

अब किसानों को क्या करना होगा?

किसानों को CBN की पात्रता सूची जारी होने का इंतजार करना चाहिए।

नाम नहीं मिलने पर संबंधित जिला अफीम अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। पात्रता का निर्धारण आधिकारिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर होगा।

opium farming के लिए सरकारी लाइसेंस अनिवार्य है। बिना अनुमति afeem plant की व्यावसायिक खेती कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।

नई नीति के तहत लाइसेंस वितरण और पात्र किसानों की अंतिम सूची अगला महत्वपूर्ण चरण होगा।

FAQs

1. नई अफीम नीति 2026-27 में कितने किसानों को लाइसेंस मिलेगा?

नई अफीम नीति 2026-27 के तहत मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लगभग 1.33 लाख किसानों को खेती के लाइसेंस मिलने की संभावना है।

2. मध्य प्रदेश के किन जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा?

नई नीति से मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिलों के लगभग 54 हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

3. अफीम की खेती के लिए लाइसेंस कैसे मिलेगा?

opium farming के लिए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) से लाइसेंस लेना जरूरी है। पात्र किसान आधिकारिक सूची में अपना नाम जांच सकते हैं।

4. नई अफीम नीति में कितने नए किसानों को मौका मिलेगा?

नीति 2026-27 के तहत पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18 हजार अतिरिक्त किसानों को खेती का अवसर मिलने की संभावना है।

5. अफीम की खेती के लिए कितनी जमीन मिलेगी?

नई नीति में पारंपरिक चीरा पद्धति के लिए 0.10 हेक्टेयर और CPS पद्धति के लिए 0.05 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है।

6. CPS पद्धति क्या है?

CPS यानी Concentrated Poppy Straw पद्धति में अफीम के पौधों पर पारंपरिक चीरा लगाने के बजाय पोस्त सामग्री एकत्र की जाती है।


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