उज्जैन में आज सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर Mahakal Sawari 2026 निकाली जा रही है। भगवान महाकाल की यह सावन महीने की अंतिम भव्य सवारी होगी। तड़के 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और भस्म आरती संपन्न हुई।
सवारी शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी। बाबा महाकाल नंदी रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और रामघाट पहुंचकर शिप्रा जल से अभिषेक किया जाएगा।
महाकाल की सवारी आज कितने बजे निकलेगी?
Mahakal Sawari शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से निकलेगी। सवारी महाकाल चौक, गुदरी चौराहा, बक्शी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां भगवान महाकाल का शिप्रा नदी के जल से अभिषेक और पूजन होगा।
इसके बाद सवारी रामानंद आश्रम, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और पटनी बाजार होते हुए मंदिर लौटेगी। वापसी शाम करीब 7 से 7:30 बजे के बीच होने की जानकारी दी गई है।
सुबह 2:30 बजे खुले मंदिर के कपाट
सावन के अंतिम सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु भस्म आरती के लिए मंदिर पहुंचे। सोमवार को विशेष व्यवस्था के तहत तड़के 2:30 बजे मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद बाबा महाकाल का पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक कर विशेष शृंगार किया गया।
सावन के दौरान सोमवार को भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट 2:30 बजे खोलने की व्यवस्था तय की गई थी। यह व्यवस्था 30 जुलाई से 7 सितंबर तक लागू रहने की जानकारी मंदिर व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्ट में दी गई है।
आज की सवारी क्यों खास है?
24 अगस्त की सवारी सावन महीने की चौथी और अंतिम सवारी है। परंपरा के अनुसार बाबा महाकाल सावन-भादो में नगर भ्रमण पर निकलते हैं और श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।
इस बार सवारी में बाबा नंदी रथ पर विराजमान होकर निकलेंगे। सवारी के साथ झांकियां, पुलिस बैंड, डमरू दल और भजन मंडलियां भी शामिल रहेंगी।
यहां एक जरूरी बात यह है कि 24 अगस्त की सवारी सावन की अंतिम सवारी है, पूरे साल की अंतिम महाकाल सवारी नहीं। भादौ मास में भी सवारियां निकलेंगी और 7 सितंबर को राजसी शाही सवारी प्रस्तावित है।
श्रद्धालुओं के लिए क्या मायने है?
अंतिम सावन सोमवार होने के कारण उज्जैन में सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ पहुंची है। ऐसे में सवारी के मार्ग पर भीड़ बढ़ने की संभावना है।
दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन और पुलिस द्वारा निर्धारित प्रवेश, निकास तथा भीड़ प्रबंधन व्यवस्था का पालन करना होगा। पिछले सोमवार और नागपंचमी पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे और अलग-अलग प्रवेश-निकास मार्ग बनाए गए थे।
आगे क्या होगा?
सावन की चार सवारियों के बाद भादौ मास की सवारी का क्रम जारी रहेगा। 31 अगस्त को एक और सवारी और 7 सितंबर को राजसी शाही सवारी प्रस्तावित है।
इसलिए 24 अगस्त की सवारी को सावन की अंतिम भव्य सवारी कहना सही है, जबकि महाकाल की सवारी का पूरा क्रम सितंबर तक चलेगा।
महत्वपूर्ण बातें
- तारीख: 24 अगस्त 2026
- अवसर: सावन का चौथा और अंतिम सोमवार
- भस्म आरती: तड़के 2:30 बजे से
- महाकाल सवारी: शाम 4 बजे
- मुख्य पड़ाव: रामघाट
- विशेषता: बाबा महाकाल नंदी रथ पर नगर भ्रमण करेंगे
- सावन की सवारी: यह चौथी और अंतिम सवारी है
- अगली प्रमुख सवारी: 7 सितंबर को राजसी शाही सवारी प्रस्तावित है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1. महाकाल की अंतिम सावन सवारी कब निकलेगी?
सावन की चौथी और अंतिम सवारी 24 अगस्त 2026 को शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से निकलेगी।
सवाल 2. महाकाल मंदिर के कपाट आज कितने बजे खुले?
सावन के अंतिम सोमवार को भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट तड़के 2:30 बजे खोले गए।
सवाल 3. महाकाल की सवारी कहां जाएगी?
सवारी मंदिर से निकलकर रामघाट पहुंचेगी। यहां शिप्रा जल से बाबा महाकाल का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।
सवाल 4. क्या 24 अगस्त के बाद महाकाल की सवारी नहीं निकलेगी?
नहीं। 24 अगस्त सावन की अंतिम सवारी है। इसके बाद भादौ मास में सवारियां होंगी और 7 सितंबर को राजसी शाही सवारी प्रस्तावित है।