इंदौर में भागीरथपुरा जल संकट के बाद प्रशासन ने जल सुरक्षा को लेकर नई योजना तैयार की है। जिले के सभी जल स्रोतों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड बनाया जाएगा। साथ ही इनकी जियो टैगिंग भी होगी।
जल स्रोतों की होगी नियमित निगरानी
एनजीटी के निर्देशों के तहत इंदौर में वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेल बनाई गई है। यह टीम नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की गुणवत्ता पर नजर रखेगी।
योजना में सतही जल, भूजल, कुएं और बावड़ियों के संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। दूषित पानी के उपचार और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए नौ बिंदुओं की कार्ययोजना बनाई गई है।
भागीरथपुरा घटना के बाद जांच में क्या मिला?
भागीरथपुरा की घटना को जांच रिपोर्ट में जल जनित आउटब्रेक बताया गया। पानी के नमूनों में ई-कोलाई बैक्टीरिया और अन्य दूषित तत्व मिले थे।
रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में 35 लोगों की जान गई थी। इसके बाद सरकार ने जल स्रोतों में सीवरेज का पानी मिलने से रोकने के उपायों पर जानकारी मांगी है।
कान्ह और सरस्वती नदी पर भी नजर
प्रशासन अब दूषित पानी वाले हॉटस्पॉट चिह्नित करेगा। कान्ह और सरस्वती नदी के किनारे ऐसे संवेदनशील क्षेत्र चिन्हित किए जाएंगे।
नदियों और तालाबों को कचरे और अवैध अतिक्रमण से बचाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। भूजल स्रोतों की जियो टैगिंग के साथ वॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा मिलेगा।
आगे क्या होगा?
भागीरथपुरा जल संकट के बाद तैयार योजना में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पीएचई और नगर निगम मिलकर काम करेंगे। जल स्रोतों की स्थिति के आधार पर हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार होंगे।
दूषित पानी से जुड़ी शिकायतों के लिए ऑनलाइन सिस्टम और ईवीएन अलर्ट ऐप का उपयोग किया जा सकेगा। इससे शिकायतों के त्वरित समाधान में मदद मिलेगी।